बिन मौसम बारिश के बाद की एक रात
ओह क्या सुहानी होती है
जैसे कभी जब सोचा भी ना हो और घर से मनी आर्डर आ जाये
कुछ ऐसा ही कर गई आज की ये बिन मौसम की बरसात
टिप-टिप करते देर तक पानी की बुँदे
जो अभी तक एक एहसास दिलाती है की यंहा हुई है आज एक बरसात
धुले हुवे सड़क भींगी हुवी मिट्टी से निकलने वाली वो महक
तो कभी पेड़ का अपने पत्तों पे रुके हुवे पानी का गिराना
कुछ ऐसा लगता है जैसे सिगरेट पीते,बात करते धीरे-२ कोई राख़ झाड़ रहा है
और स्ट्रीट लाइट में वो चमकती हुवी सीमेंटेड सड़क
ऐसा लगता है किसी ने महंगे वाले रंग से एक कैनवस रंगा है ....
और सारा पैसा खर्च कर दिया है एक सड़क की पेंटिंग में ...
तेज़ दौड़ती गाडियों की , रुके हुवे पानी को चीर के आगे बढ़ने की वो झंन्न्न सी आवाज .......
सब कुछ कभी कभी अच्छा लगता है
जब ऐसे ही कोई बिन मौसम के बरसात होती है
शायद यही वजह है की आज बिन मौसम के इस बरसात में मुम्बई भी अच्छा लगता है ........
