चली है एक नाव
कुछ ख्वाबों को सर पे लेके
दाम लिए हैं सबसे
और एक वादा किया है
उस पार पँहुचाने का
रास्ते में कंही कोई रोडब्रेकर नहीं
फिर भी नाव उछलती है हिलती है ...
रास्ते चलते हैं साथ-साथ
रास्ते में मिलते गए कुछ उड़ते पंछी
ख्वाब उनके भी थे उनके परों पर
और दूर तक सिर्फ धुन्ध और समन्दर था ख्वाबों का
फिर ख्वाबों ने ख्वाबों से बात किये .....
बहूत देर हो गई ख्वाबों के लहरों में .
अब भूख लगी है ख्वाबों को ...
सुना है उस पार एक रेस्टोरेंट है ख्वाबों का
ख्वाब खाएंगे ख्वाब पियेंगे
जब ख्वाबों से ख्वाब मिलेंगे
कुछ हकीक़त के लहरों पे
चली है एक नाव
कुछ ख्वाबों को सर पे लेके

nice post bro
ReplyDeleteचली है एक नाव
ReplyDeleteकुछ ख्वाबों को सर पे लेके
दाम लिए हैं सबसे
और एक वादा किया है
उस पार पँहुचाने का
achhi line likhi hai
http://shayaridays.blogspot.com